भारत का इतिहास और जिंदगी का संघर्ष समझाने वाली खूबसूरत कविता, यहाँ पढ़े

कविता – ” नमन तुम्हें मैं करता हूँ “

हमारे पाठक : मांगेराम प्रेमी ( हरिद्वार )

नाम रहेगा सदा अमर,

ये वचन तुम्हें मैं करता हूँ,

है भारत के भाग्यविधाता,

नमन तुम्हें में करता हूँ।

सारा जीवन खपा तुम्हारा राष्ट्रवाद को लाने में,

शोषित, पीड़ित मानवता को हर इन्साफ दिलाने में,

जुल्म, ज्यादती, ना इन्साफी और जाति की दीवार मिली थी,

छु‌आछूत के कुष्ठरोग से भारत माँ बीमार मिली थी,

झुठा हैं भगवान यहाँ पर जो उसने नही विचार किया,

तुम भारत के युग- परिवर्तक तुमने ही उपचार किया।

है भारत के भाग्यविधाता नमन तम्हें मैं करता हूँ,

तेरा युग- परिवर्तक नहीं रुकेगा,

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ये वचन मैं तुम्हें करता हूँ।

नरक भरा जीवन नारी का और हजारो बन्धन थे,

दर्द, वेदना,पीड़ा,आँसू यह नारी के कंगन थे,

हिन्दू कोड बिल लाकर तुमने भारत माँ पर उपकार किया,

सदियों से पीड़ित, वंचित नारी को उसका हर आधिकार दिया,
अगर बुलंदी पर नारी हैं तो बाबा तेरा ही ये दर्शन हैं,

आज देश की हुक्मरान है बहुत बड़‌ा परिवर्तन हैं,

नारी के मुक्तिदाता,

अर्पित सुमन तुम्हें मैं करता हूँ,

है भारत के आग्यविधाता, नमनः तुम्हें मैं करता हूँ।

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कविता : कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती…

हमारे पाठक : मांगेराम प्रेमी ( हरिद्वार

लहरों से डरकर नौका कभी पार नहीं होती,

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कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती,

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती हैं,

चढ़ती दीवारों पर सौ बार फिसलती हैं,

मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,

चढ़‌कर गिरना, गिरकर चढ़‌ना अखरता है,

आखिर उसकी हमत बेकार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

 

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,

जा जाकर खाली हाथ लौटकर आता है,

मिलते न सहज ही मोती गहरे पानी में,

बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में,

मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

असफलता एक चुनोती हैं इसे स्वीकार करो,

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क्या कमी रह गयी, देखो और सुधार करो,

जब तक न सफल हो नींद चैन की त्यागो तुम,

संघर्षों का मैदान छोड़कर मत भागो तुम,

बिना कुछ किए ही जय-जयकार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

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